इसी के पास अमर प्रिंटर्स के बोर्ड वाली गली से अंदर जाने वाला रास्ता शेखपुर मोहल्ले की एक गली की तरफ मुड़ता है। यहां की सड़क पिछले कई सालों से इतनी खस्ताहाल और जर्जर है, मानो यहाँ कभी सड़क बनी ही न हो। थोड़ा अंदर बढ़ने पर विकास के दावों की पोल पूरी तरह खुल जाती है। नालियों का गंदा और बजबजाता हुआ पानी सड़कों के ऊपर बह रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बरसात हो या न हो यहां पर हमेशा नाली का पानी सड़क पर बहता है लेकिन बरसात में स्थित और खराब हो जाती है। चारों ओर कीचड़ ही कीचड़ दिखाई देता है। समझ नहीं आता कि पैर कहां पर रखकर हम आगे बढ़े। बच्चों के स्कूल जाने के समय अक्सर कपड़े खराब हो जाते है। लोगों को इसी गंदे, संक्रामक पानी के बीच से पैर डुबोकर आना-जाना पड़ता है। स्थिति इतनी गंभीर है कि यहाँ कभी भी बड़ी महामारी या बीमारियाँ पैर पसार सकती हैं।
हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका प्रशासन और जौनपुर जिला प्रशासन ने सालों से इस गंभीर समस्या की तरफ आँखें मूंद रखी हैं। स्थानीय जनता इस नरकीय जीवन से छुटकारा पाने के लिए अब प्रशासन से ठोस कदम उठाने की गुहार लगा रही है। देखना यह होगा कि इस ग्राउंड रिपोर्ट के बाद कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन जागता है या नहीं।
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